संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 1 अक्टूबर 2026 को अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर लिए ।100 साल का ऐतिहासिक सफर, भारत में पहले ‘पब्लिक सर्विस कमीशन’ की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। सर रॉस बार्कर इसके पहले अध्यक्ष बने थे। इसकी नींव ‘ली कमीशन’ (1924) की सिफारिशों पर रखी गई थी।

1926 पब्लिक सर्विस कमीशन (Public Service Commission) 1937 फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन (Federal Public Service Commission) 1950 संविधान लागू होने के बाद 26 जनवरी 1950 को इसे वर्तमान नाम संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) मिला। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 तक इसके अधिकार और स्वायत्तता का वर्णन है। एच.के. कृपलान स्वतंत्रता के बाद इसके पहले भारतीय अध्यक्ष बने थे।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 30 सितंबर और 1 अक्टूबर 2026 को ‘मंथन’ नाम से दो दिवसीय शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस अवसर पर पीएम मोदी ने एक स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी किया तथा “100 Historic Decisions Shaping the Policies of UPSC and Public Service Commissions in India” नामक पुस्तक का विमोचन किया। भविष्य के परीक्षा सुधार UPSC के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोग ने परीक्षा प्रणाली में बदलाव के संकेत दिए हैं। चेयरमैन डॉ. अजय कुमार ने बताया कि भविष्य की परीक्षाओं में रटने की बजाय उम्मीदवारों की रीजनिंग
स्पॉन्टेनियस थिंकिंग और अस्पष्ट परिस्थितियों में सटीक निर्णय लेने की क्षमता पर ज्यादा फोकस किया जाएगा।पिछले दशकों में महिला उम्मीदवारों की भागीदारी और भारतीय भाषाओं में साक्षात्कार (व्यक्तित्व परीक्षण) के अवसरों में भी काफी विस्तार हुआ है।