डोल ग्यारस पर प्रदेशभर में धार्मिक आयोजन हुए। उज्जैन में अलग-अलग इलाकों से डोल और झांकियों के साथ चल समारोह निकाले गए, जो हरसिद्धि मंदिर पहुंचे। भगवान कालभैरव की सवारी भी निकाली गई। इंदौर में विभिन्न समाजों के डोल और धार्मिक चल समारोह निकाले गए।
डोल ग्यारस के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के देवास जिले के हाटपीपल्या में भमोरी नदी के नृसिंह घाट पर भगवान नृसिंह की साढ़े सात किलो वजनी पाषाण की प्रतिमा पानी में तीन बार तैराई गई। इस चमत्कारी और ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए भमोरी नदी के किनारे हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे। तीन बार तैरी पाषाण प्रतिमा,मान्यता के अनुसार, यदि भगवान नृसिंह की यह भारी पत्थर की प्रतिमा पानी में तैर जाती है, तो आने वाला वर्ष क्षेत्र के लिए सुख, समृद्धि और मंगलमय रहता है।
इस बार भी प्रतिमा तीनों बार पानी पर तैरती रही।सदियों पुरानी परंपरा हाटपीपल्या में यह परंपरा पिछले 127 से अधिक वर्षों से लगातार चली आ रही है।मंदिर के पुजारी द्वारा मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमा को नदी के जल में छोड़ा जाता है।प्रदेशभर में उल्लास: इस मौके पर सिर्फ देवास ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में भव्य चल-समारोह और विमान यात्राएं निकाली गईं। सीहोर में भी कोलीपुरा के नृसिंह लक्ष्मी मंदिर से करीब 20 फीट ऊंचा भव्य डोल निकाला गया, जो मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।