2 अक्तूबर को मोबाइल दुकानदार मनाएंगे नो यूपीआई डे, दीपके ने सीएम हिमंत को दी चुनौती देशभर के मोबाइल रिटेलर्स 2 अक्तूबर को 0.4 फीसदी एमडीआर के विरोध में ‘नो यूपीआई डे’ मनाने वाले हैं। एआईएमआरए के मुताबिक, 2,000 रुपये से ज्यादा के व्यापारिक यूपीआई भुगतान पर लागू शुल्क से छोटे दुकानदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। संगठन ने 5 लाख से 30 लाख रुपये !
रिटेलर्स के लिए 2,000 से 12,000 रुपये तक मासिक नुकसान का अनुमान जताया है। एआईएमआरए की मांग है कि व्यापारियों के लिए यूपीआई को जीरो एमडीआर व्यवस्था के तहत जारी रखा जाए।0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का विरोध: सरकार आगामी 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक यूपीआई ट्रांसफर ! पर 0.4 फीसदी का एमडीआर शुल्क लागू करने जा रही है। ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशनऔर चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री जैसे संगठन इसी अतिरिक्त शुल्क का विरोध कर रहे हैं।
मोबाइल एसोसिएशन का कहना है कि मोबाइल जैसे कम मार्जिन वाले व्यापार में बड़े ट्रांजैक्शन आम हैं। नए नियम से हर छोटे रिटेलर को हर महीने 2,000 रुपये से लेकर 12,000 रुपये तक का सीधा नुकसान उठाना पड़ेगा, जिससे उनकी कमाई पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।कैश लेन-देन को बढ़ावा देने की मजबूरी: व्यापारियों का तर्क है कि इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ के कारण वे डिजिटल पेमेंट छोड़कर दोबारा नकद (कैश) भुगतान की तरफ लौटने को मजबूर हो जाएंगे।यूपीआई सिस्टम बंद नहीं होगा: यह केवल एक सांकेतिक विरोध है। बैंक या यूपीआई नेटवर्क बंद नहीं रहेंगे, वे हमेशा की तरह काम करेंगे। केवल प्रदर्शन में शामिल दुकानें प्रभावित: केवल वही दुकानदार पेमेंट नहीं लेंगे जो इस आंदोलन में शामिल हैं।