केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सुरक्षा में पुलिस बल और अधिकारी मुस्तैद रहे, लेकिन नवरात्र में माता के दर्शनों के लिए सड़कों पर उमड़ रहे हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को नज़रअंदाज़ की गई ।

शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात संभालने वाले पुलिसकर्मियों की गैरमौजूदगी, सड़कों पर वाहन चालकों की मनमानी और गरबा स्थलों पर असामाजिक तत्वों की गतिविधियों ने पुलिस व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। हालात ऐसे रहे कि माता के दर्शन करने निकली महिलाओं, बच्चों और परिवारों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए भी जिम्मेदार पुलिस अमला नजर नहीं आया।
सवाल यह है कि क्या वीआईपी सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हुए आमजन की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को इस तरह नजरअंदाज किया जा सकता है।केंद्रीय मंत्री के दो दिवसीय अशोकनगर प्रवास के दौरान पुलिस बल और अधिकारी उनकी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहे। दूसरी ओर, दिनभर की भागदौड़ के बाद रात के समय शहर की सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी बेहद कमजोर दिखाई दी। नतीजतन, नवरात्र के दौरान माता के दर्शनों के लिए निकलने वाले श्रद्धालु अव्यवस्थित यातायात के बीच आवागमन करने को मजबूर रहे।