विधान सभा चुनाव से पहले योगी सरकार ने 36 सड़कों के निर्माण के लिए 3095 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय स्वीकृति दी है।विधान सभा चुनाव का समय करीब आते ही प्रदेश सरकार अपनी तैयारियों को चाक चौबंद करने में जुट गई है। विपक्ष द्वारा विधान सभा क्षेत्रों में सड़कों की खराब स्थिति को चुनावी मुद्दा बनाए जाने की आशंका के मद्देनज़र सड़कों का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरूकराने की दिशा में काम शुरू किया गया है।
लोक निर्माण विभाग इन सड़कों के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है। व्यय वित्त समिति की बैठक में स्वीकृत सड़कों की लागत 25 करोड़ रुपये से लेकर 665 करोड़ रुपये तक है। व्यय वित्त समिति से स्वीकृत 200 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को अब कैबिनेट के समक्ष स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
10 सितंबर को हुई समिति की बैठक में पीडब्ल्यूडी की 21 परियोजनाओं को स्वीकृति दे दी गई, जिनमें सीतापुर की दो, मीरजापुर की एक, देवरिया की दो, महाराजगंज की एक, सोनभद्र की पांच, बांदा की एक, वाराणसी की एक, चित्रकूट की दो, झांसी की एक, लखनऊ की दो, लखीमपुर खीरी की एक और संभल जिले की एक सड़क शामिल है।इसी प्रकार, 17 सितंबर की बैठक में गोरखपुर की तीन, गोंडा की छह, एटा की एक, सीतापुर की एक, सोनभद्र की एक, देवरिया की एक और वाराणसी जिले की दो सड़क परियोजनाओं को समिति ने स्वीकृति दी।
फर्रूखाबाद में जिला ग्राम्य विकास संस्थान के आवासीय और अनावासीय भवनों तथा मथुरा और सोनभद्र में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय के निर्माण के लिए भी वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई।अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास की योजनाओं के तहत कानपुर देहात, प्रयागराज, फतेहपुर, हमीरपुर और झांसी में बीडा के विकास से संबंधित 10 परियोजनाओं के लिए भी वित्तीय स्वीकृति दी गई।