आजादी के बाद पहली बार हो रही जाति जनगणना पर कांग्रेस को सहयोगी दलों का साथ नहीं मिल रहा है। जाति जनगणना कराने के तरीके पर कांग्रेस हुई आक्रमक ।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर जनगणना में ओबीसी जातियों को गिनने के तरीके पर आपत्ति जताई है, लेकिन कांग्रेस के सहयोगी दलों की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे है। हैरानी की बात तो यह हैं की ओबीसी की राजनीति करने वाली पार्टियों ने भी इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है।
दरअसल जातियों की गणना के लिए जनगणना के फार्म में खुद अपनी जाति बताने को कहा गया है। कांग्रेस का कहना है कि इससे 2012 की सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना की तरह लाखों जातियां सामने आ जाएगी, जिससे जाति गणना का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
ओबीसी की राजनीति करने वाली करने वाली पार्टियों की चुप्पी को ओबीसी जातियों के टकराव और ओबीसी वोटबैंक के बिखराव से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले की तरह अब कोई एक पार्टी या नेता ओबीसी की राजनीति का मसीहा होने का दावा नहीं कर सकता है।
सत्ता में वापसी की कोशिश में जुटी सपा सामाजिक आधार बढ़ाने के लिए अन्य ओबीसी जातियों के साथ-साथ सवर्णों, दलितों और महिलाओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है।