जीएसएलवी-एफ17 का सफल प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए सामान्य उपलब्धि नहीं। इसरो की ताजा कामयाबी निश्चित ही आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है, लेकिन जश्न मनाने का समय कम है। श्री हरिकोटा से शुक्रवार तड़के जीएसएलवी-एफ17 का सफल प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए महज सामान्य उपलब्धि नहीं है।
इस रॉकेट ने जियोसैट-1ए, यानी ईओएस-05 को उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर न केवल देश की पृथ्वी-अवलोकन क्षमता को विस्तार दिया, बल्कि एक ऐसे अभियान को भी उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया, जो लंबे समय से अनिश्चितता से गुजर रहा था।
यह कामयाबी ऐसे वक्त में मिली है, जब 2025 और जनवरी, 2026 में इसरो के प्रमुख प्रक्षेपण रॉकेट पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल, यानी पीएसएलवी को विफलताओं का सामना करने के बाद भारत की प्रक्षेपण क्षमता पर सवाल उठाए जा रहे थे।
यही रॉकेट भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के सबसे महत्वपूर्ण प्रतीकों में से भी एक है। ईओएस-05 का सफल प्रक्षेपण इसलिए भी अहम है, क्योंकि पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह अब भारत की विकास जरूरतों का हिस्सा बन चुके हैं।कृषि से लेकर जल संसाधन प्रबंधन, मौसम की निगरानी से लेकर आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक, अंतरिक्ष से मिलने वाले आंकड़ों का उपयोग बढ़ रहा है।