देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच राहत की उम्मीद जगी है। ब्राजील से आयात की जाने वाली कच्ची चीनी की कुछ खेप 15 अक्तूबर से पहले भारत पहुंच सकती है। हालांकि, तब तक कितनी चीनी देश में पहुंचेगी, इसका सटीक अनुमान लगाना अभी मुश्किल है। सहकारी चीनी मिलों के राष्ट्रीय महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश नाईकनावारे के अनुसार फिलहाल भारत के लिए चीनी आयात का सबसे व्यावहारिक विकल्प ब्राजील ही है।
चीनी की जमाखोरी और कीमतों में तेजी को लेकर सरकार की सख्ती का असर भी दिखने लगा है। शनिवार को खुली निविदाओं में मिलों से निकलने वाली चीनी का भाव करीब पांच रुपये प्रति किलो घट गया।चीनी आयात की प्रक्रिया भी लंबी है। सबसे पहले विदेश व्यापार महानिदेशालय से मंजूरी और आयात का आवंटन होता है। इसके बाद भुगतान के लिए साख पत्र जारी किया जाता है।

ऐसे में खेप कब रवाना होगी और भारत कब पहुंचेगी, यह कई बातों पर निर्भर करेगा। सरकार 31 अक्तूबर तक खेप पहुंचने की समयसीमा को बहुत सख्ती से लागू नहीं करेगी। अगर कोई खेप इस अवधि में रवाना हो चुकी है और रास्ते में है, लेकिन कुछ देर से पहुंचती है, तो उस पर भी विचार किया जा सकता है।
सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी थी। यह फैसला ऐसे समय लिया गया, जब घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही थी। एक महीने के दौरान चीनी के दाम करीब 24 प्रतिशत बढ़ गए थे। कीमतें 56 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं।