रात के समय सामने से आने वाले वाहनों की तेज रोशनी से होने वाली परेशानी और दुर्घटना के जोखिम को कम करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नए प्रस्ताव पेश किए हैं। भविष्य में नए दोपहिया वाहनों में ऑटोमैटिक हेडलैंप ऑन प्रणाली के सक्रिय होने पर हेडलैंप केवल पासिंग बीम यानी लो-बीम पर काम करेगा।
मंत्रालय ने हेडलैंप की अधिकतम रोशनी की तीव्रता को लेकर भी सख्त बदलाव प्रस्तावित किए हैं। इसका उद्देश्य अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं को तेज रोशनी से होने वाली परेशानी कम करना और रात में बेहतर दृश्यता सुनिश्चित करना है।तेज और चकाचौंध पैदा करने वाली हेडलैंप रोशनी सामने से आने वाले वाहन चालकों की दृश्यता को प्रभावित कर सकती है।

ऐसे में ऑटोमैटिक हेडलैंप को लो-बीम तक सीमित करने और रोशनी की अधिकतम तीव्रता घटाने का प्रस्ताव सड़क पर अन्य उपयोगकर्ताओं के लिए बेहतर दृश्यता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इन प्रस्तावित उपायों का मुख्य उद्देश्य देश में रात के समय होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना है।ऑटोमैटिक लो-बीम की तीव्रता में कटौती जैसेनियम लागू करने से रात के समय होने वाले जानलेवा सड़क हादसों और दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।